'संचार शक्ति' को पब्लिक-प्राइवेट-पीपल पार्टनरशिप मॉडल पर शुरू किया गया था। इसके लिए 'डिजिटल भारत निधि' (DBN) ने सब्सिडी एग्रीमेंट के ज़रिए आर्थिक मदद दी। इस मदद से mVAS पर कंटेंट बनाने, ट्रेनिंग या हैंडहोल्डिंग और सर्विस प्रोवाइडर द्वारा VAS जानकारी फैलाने के काम में सब्सिडी दी गई। DBN और सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच पुणे (महाराष्ट्र), उत्तराखंड, अजमेर (राजस्थान) और श्रीकाकुलम, पूर्वी गोदावरी और विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) के सर्विस एरिया में चार एग्रीमेंट साइन किए गए।
सर्विस प्रोवाइडर के NGO पार्टनर ने लाभार्थियों को चुना, उन्हें शिक्षित किया और उनमें जागरूकता फैलाई। 'संचार शक्ति' के तहत बाकी पायलट प्रोजेक्ट्स में सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर राजस्थान में M/s भारती हेक्साकॉम लिमिटेड (BHL) और M/s रॉयटर्स मार्केट लाइट इन्फॉर्मेशन सर्विसेज़ प्राइवेट लिमिटेड शामिल थे। सर्विस प्रोवाइडर्स ने हर व्यक्ति की ज़रूरतों या पसंद का आकलन करके, उनकी ज़रूरतों के हिसाब से कस्टमाइज़्ड और लोकलाइज़्ड VAS पैकेज तैयार करने में लक्षित लाभार्थियों को सक्रिय रूप से शामिल किया।
